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आधुनिक भौतिकी और भौतिकवाद के लिए संकट

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1. परिचय
क्वाण्टम भौतिकी और सापेक्षिकता सिद्धान्त के आने, एक सूक्ष्म विश्व के सामने आने, और उसमें न्यूटनीय भौतिकी के नियमों के लागू न होने के कारण, 20वीं सदी का मध्य आते-आते वैज्ञानिकों की बडी संरव्या का मत यह हो गया था कि आधुनिक भौतिकी संकट का शिकार है। पिछले 30-35 सालों के दौरान भी कोई सिद्धान्त भौतिकी के समकालीन बुनियादी सवालों का पूरा समाधान पेश नहीं कर पाया है, और पूरे ब्रम्हाण्ड की उत्पत्ति से लेकर, उसके विकास और समय की अवधारणा पर शोध और प्रयोग जारी हैं। इन शोधों और प्रयोगों पर पूरे भौतिक विश्व की हमारी भावी समझ निर्भर करती है। लेकिन यह भी सच है कि क्लासिकीय भौतिकी के लिए संकट पैदा कर देने वाली 20वीं सदी ने प्रकृति और ब्रम्हाण्ड के बारे में हमारी समझदारी को एक नये धरातल पर भी पहुँचाया। पिछले 100 सालों में सापेक्षिता का सिद्धान्त, क्वाण्टम सिद्धान्त, स्टैण्डर्ड माॅडल आदि ने पदार्थ जगत के बारे में हमारे बोध को सूक्ष्म एवं गहन बनाया है। पुरानी अवधारणाओं को हटाकर नये तथा बेहतर सिद्धान्त खुद को स्थापित करते रहे हैं, हालाँकि समय के साथ उनमें से कई ग़लत भी साबित हो गये।
भौतिकी में हु…